उज्जैन। इस मानसून सत्र के पिछले सवा दो माह में उज्जैन जिले में अब तक हुई वर्षा का औसत पिछले वर्ष से करीब पौने दो इंच ज्यादा है। इसके साथ ही जिले की उज्जैन सहित 3 तहसीलों में इस अवधि में 4 इंच से 1 इंच तक कम वर्षा की स्थिति सामने आ रही है।मानसून विभाग की और से पूर्व घोषित स्थितियों में भी फेर है।तीन दिन पहले उज्जैन में अगले 4 दिनों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी हुई थी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
इस वर्ष मानसून पहले ही करीब 5 दिन देरी से आया है। इसके बाद अलनीनो से प्रभावित होने का फेर उस पर प्रभावी रहा है। मानसून के प्रारंभिक दिनों से लेकर अब तक जिले में औसत वर्षा करीब 20 इंच ही हुई है जो कि पिछले वर्ष से करीब पौने 2 इंच ज्यादा है। इसमें भी उज्जैन , तराना,माकडौन तहसील में पिछले वर्ष के मुकाबले 4 से लेकर 1 इंच तक बारिश कम हुई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में मानसून फिर जोर पकड़ सकता है और प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
पिछले वर्ष की अपेक्षा कहां कितनी वर्षा-
तहसील अब तक वर्षा पिछले वर्ष
उज्जैन 374.2 451.0
घटिट्या 375.0 257.5
खाचरौद 447.0 373.0
नागदा 450.8 348.9
बडनगर 377.0 313.0
महिदपुर 454.0 323.0
झार्डा 459.0 450.4
तराना 441.2 475.3
माकडौन 172.0 223.0
स्त्रोत-जिला भू-अभिलेख से जारी आंकडों के आधार पर।
सबसे कम माकडौन,सर्वाधिक झार्डा-
जिले की वार्षिक औसत वर्षा 906.2 मिलीमीटर यानिकी 36.2 इंच है। इसमें मानसून सत्र 01 जून से 30 सितंबर तक रहता है। जिले में पिछले सवा दो माह में अब तक सबसे कम बारिश माकडौन तहसील में हुई है । इसकी अपेक्षा झार्डा में इस अवधि में सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई है।
प्रदेश में 18 फीसदी घाटा-
प्रदेश में मानसून की हालत पस्त हो गई है। पिछले 5 दिनों से कहीं भी व्यापक और भारी बारिश दर्ज नहीं होने से इस मानसून सत्र में अब तक प्रदेश में वर्षा का घाटा 18 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। प्रदेश के 55 में से 43 जिले सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं और पूरे सीजन में अब तक औसत से करीब साढ़े तीन इंच कम पानी बरसा है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मौसम प्रणालियां पर्याप्त मजबूत नहीं रहीं, इसलिए प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश ही हुई। हालांकि, अब उत्तर भारत में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण और नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती है।
कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक औसतन 16 इंच (407.2 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 19.5 इंच (495.2 मिमी) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश सामान्य से करीब 18 प्रतिशत पीछे है और अब तक सामान्य वर्षा का आधा आंकड़ा भी पूरा नहीं हो सका।
मात्र कुछ जिलों में औसत से अधिक-
प्रदेश में बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसकी अपेक्षा जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में हालात अधिक चिंताजनक हैं। यहां औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है और सभी जिले सामान्य से पीछे हैं। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।